ज्वलंत विचार

उत्तर भारतीय महासंघ के ज्वलंत विचार

 

उत्तर प्रदेश वह भूमी है जहां आर्य संस्कृत में अपना उज्जवल स्वरूप प्राप्त कर पूरे राष्ट्र को ज्ञान के आलोक से प्रकाशित किया अनेक ऋषि-मुनियों की तपस्थली भगवान राम कृष्ण की लीला स्थली मोक्षदायिनी गंगा यमुना देश को प्रदान करने वाली अनेक तीर्थ नगरीयो वाली ऊत्तर प्रदेश की भूमि का न सिर्फ प्राचीन काल का इतिहास गौरवमय रहा है बल्कि अर्वाचीन इतिहास भी उत्तर प्रदेश वासियों के चेहरों को स्वाभिमान से अभिभूत कर रहा है |

अंग्रेजो के सीने में स्वतंत्रता संग्राम की पहली गोली दागने वाला वीर सेनानी मंगल पांडे विश्व को महिला शक्ति का स्वरुप दिखाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के दांत तोड़ने वाले क्रांतिकारी वीर चंद्रशेखर आजाद रामप्रसाद बिस्मिल अशफाक उल्ला खान पाकिस्तान युद्ध में पेटर्न टैंक को खिलौने की तरह ध्वस्त करने वाला अब्दुल हमीद मोतीलाल नेहरू जवाहरलाल नेहरू लाल बहादुर शास्त्री गोविंद बल्लभ पंत पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे प्रखर राष्ट्रवादी नेता सांप्रदायिक एकता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाला पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी विश्व का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय बनाने वाले शिक्षा शास्त्री पंडित मदन मोहन मालवीय इसी प्रदेश की देन है देश को 8 प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश से मिले हैं भारत के अलावा कई देशों के प्रधानमंत्री भी उत्तर प्रदेश के हैं उत्तर प्रदेश की संस्कृति की तूती सर्वत्र बोलती है करमा, चंचली,छपेली,छोलिया, पांडव थारु धोबिया शैरा जैसे लोकनृत्य और लखनऊ घराने का कत्थक नृत्य सीखने अन्य प्रदेशों के लोग चले आते हैं बिरहा ,चैती ,ढोला, कजरी, रसिया सुनने के लिए लोग लालायित रहते हैं प्रदेश के रीति रिवाजों की सर्वत्र चर्चा होती है विश्व का सातवां आश्चर्य ताजमहल आगरा में इमामबाड़ा भूल भुलैया लखनऊ में भारत के ही नहीं विदेश के पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं

उत्तर प्रदेश ने देश को अनेक मूर्धन्य साहित्यकार दिए हैं भारतेंदु हरिश्चंद्र, राहुल सांकृत्यायन ,मुंशी प्रेमचंद ,जयशंकर प्रसाद, जैनेंद्र कुमार ,सूर्यकांत निराला ,महादेवी वर्मा के साहित्य को आज पूरे विश्व में पढ़ा जाता है |

उत्तर प्रदेश सभी धर्मावलंबियों हिंदू मुसलमान इसाई सिख जैन तथा बौद्धों की पावन भूमि है, जैनों के अनेक तीर्थकर इसी प्रदेश के हैं बुद्ध ने जीवन का पहला उपदेश सारनाथ काशी में दिया था और

महानिर्वाण कुशीनगर में प्राप्त किया था सिखों के दसम गुरु गोविंद सिंह ने हेमकुंट, उत्तरांचल में तपस्या की थी जो आज सीखो का प्रमुख तीर्थस्थल है पर बहुत सारे सौभाग्य होने के बावजूद कुछ दुर्भाग्य भी हैं देश को इतने राष्ट्रीय नेता देने वाला यह प्रदेश विकास की दृष्टि से उपेक्षित ही रहा आज यहां महाराष्ट्र पंजाब हरियाणा आदि प्रदेशों की तरह बड़े बड़े उद्योग नहीं है हालांकि यहां अपार खनिज संपदा कच्चा माल मौजूद है फिर भी उद्योग नहीं लगते हैं रोजगार के साधन अत्यंत सीमित हैं इसलिए उत्तर भारतीयों को दूसरे प्रांतों की ओर पलायन करना पड़ता है और आज मुंबई में ही 50 लाख से ज्यादा उत्तर भारतीय आजीविका के लिए संघर्षरत हैं मुंबई में निवास कर रहे उत्तर भारतीयों के सामने धीरे धीरे परेशानियों और समस्याओं का अंबार लग गया है हालांकि कुछ संगठन और नेता मौजूद थे पर सब या तो संक्रीणता और निजी स्वार्थ के शिकार थे अन्यथा निष्क्रिय थे , अत : उत्तर भारतीयों की समस्याओं के निराकरण हेतु एक संगठन की आवश्यकता महसूस की गई परिणाम स्वरुप उत्तर भारतीय महासंघ का गठन किया गया यहां की दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में अपना प्रदेश छोड़कर आए उत्तर भारतीयों को अपमान भरा दोयम दर्जे का जीवन जीने को विवश है उत्तर भारतीय महासंघ ऐसे लोगों में स्वाभिमान सम्मान तथा संस्कृति की पुनर्स्थापना करना चाहता है |

भारतीय संविधान के आधार पर हम यहां के मतदाता है फिर भी हमारे साथ सौतेला व्यवहार शासन द्वारा आखिर क्यों किया जाता है अब हमारी स्थिती यहां के नागरिक की है हमारी संताने यहां जन्म ले रही हैं शिक्षा-दीक्षा मरनी करनी सब अब यही हो रहा है हमारा भी इस धरती पर संपूर्ण अधिकार है तो हमें यहां नौकरी-चाकरी व अन्य अधिकार प्राप्त क्यों नहीं ?