नारी सशक्तिकरण

सशक्त नारी, सशक्त देश

यदि किसी राष्ट्र की नारी असुरक्षित, दबी हुई, दरी हुई और कमज़ोर है, तो ऐसे देश की प्रगति असंभव है। हम शक्ति की उपासना करते हैं, नवरात्रि में कन्या पूजन करते हैं परंतु वास्तव में महिलाओं को दोयम दर्जे का जीवन जीने को मजबूर करते हैं। आप ही बताइए क्या ऐसे होगा हमारे देश का विकास?

अपाला, विश्वधरा, घोषा जैसी विदुषी महिलाएं हमारे देश में जन्मीं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना जिसने अपनी बहादुरी का दूर दूर तक लोहा मनवाया, हमारे ही देश में जन्मी थीं। आधुनिक काल में भी बहोत सी महिलाए हैं जिन्होंने हमे गर्व करने का अवसर दिया है। आज के समय की मांग है कि हम बेटी और बेटे में अंतर न समझें और उन्हें बराबर का मौका दें।

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा दिया। समय आ गया है कि हम इस बात पर अमल करें।

स्त्रियों में संगठन और प्रबंधन के गुण जन्मजात होते हैं। वो एक साथ बहोत से कार्य कर सकती हैं।
उत्तर भारतीय महासंघ भारतीय बहनो की क्षमता और हुनर से भली भांति परिचित है। संघ के क्रिया कलापों में महिलाये बढ़ चढ़ के भाग लेती हैं।


आया समय उठो तुम नारी

 

आया समय
उठो तुम नारी
युग निर्माण तुम्हें करना है
आजादी की खुदी नींव में
तुम्हें प्रगति पत्थर भरना है

अपने को
कमजोर न समझो
जननी हो सम्पूर्ण जगत की
गौरव हो
अपनी संस्कृति की
आहट हो स्वर्णिम आगत की
तुम्हे नया इतिहास देश का
अपने कर्मो से रचना है

दुर्गा हो तुम
लक्ष्मी हो तुम
सरस्वती हो सीता हो तुम
सत्य मार्ग
दिखलाने वाली
रामायण हो गीता हो तुम
रूढ़ि विवशताओं के बन्धन
तोड़ तुम्हें आगे बढ़ना है

साहस , त्याग
दया ममता की
तुम प्रतीक हो अवतारी हो
वक्त पड़े तो
लक्ष्मीबाई
वक्त पड़े तो झलकारी हो
आँधी हो तूफान घिरा हो
पथ पर कभी नहीं रूकना है

शिक्षा हो या
अर्थ जगत हो
या सेवाये हों
सरकारी
पुरूषों के
समान तुम भी हो
हर पद की सच्ची अधिकारी
तुम्हें नये प्रतिमान सृजन के
अपने हाथों से गढ़ना है।
- शैलेन्द्र सिंह चौहान


नारी सशक्तिकरण हमारा ध्येय है और नारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघ प्रतिबद्ध है।