सामुदायिक विकास

दुनिया की सबसे बडी खोज ( इन्नोवेशन ) का नाम है - संस्था

यह कथन प्रत्येक समाज के लिए शत प्रतिशत सत्य है। सामुदायिक विकास के बिना आधुनिक समाज की परिकल्पना मात्र भी असंभव है।

कोई समाज उतना ही स्वस्थ होता है जितनी उसकी संस्थाएँ ; यदि संस्थायें विकास कर रही हैं तो समाज भी विकास करता है, यदि वे क्षीण हो रही हैं तो समाज भी क्षीण होता है ।

हमे गर्व है कि हम भारतीय हैं। हमारे देश की संस्कृति प्रेम, सौहार्द और भाईचारा सिखाती है। हमारे संस्कारों में ही आपस में सहयोग करने की प्रवृत्ति है। "वसुधैव कुटुंबकम" का सही अर्थों में पालन करते हैं हम। हमारी संस्कृति का यह रूप ही हमे सबसे अलग बनाता हैं। हमे बचपन से ही सहयोग करने और मिल जुल कर कार्य करने की शिक्षा दी जाती है। हमलोग एक दूसरे के काम में हाथ बढ़ाते हैं और मिलजुलकर अपना जीवन वयतीत करते हैं। वयत्किगत क्रम से ऊपर चले तो एक समूह या समुदाय की बात आती है। उत्तर भारतीय महासंघ हमारी संस्कृति के ताने बाने को भली भांति समझ कर सबके सर्वांगीण विकास की आकांक्षा रखता है। हम सब मिलजुल कर एक साझा उद्देश्य के लिए काम करते हैं और सामुदायिक विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उत्तर भारतीय महासंघ उत्तर भारतीयों को संगठित रखने के लियव सदैव प्रयत्नषील रहता है। हम सभी उत्तर भारतीयों को संगठित करके अपने विकास का मार्ग मौजूद संसाधनो के द्वारा एक सामूहिक प्रयास से तय करते हैं।

हमारे देश में समुदाय स्तर पर विकास करने की संकल्पना नवीन नही है। यह तत्व भारतीय संस्कृति में पहले से मौजूद हैं। हमारा संघ प्रयास करता है कि हम सामुदायिक विकास का कार्य और आगे बढ़ाएं।

आखिर क्या हैं सामुदायिक विकास ?

सामुदायिक विकास वास्तव में एक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत समुदाय विशेष के लोग एकजुट होकर अपनी एक जैसी समस्याओ के समाधान के लिए सामूहिक स्तर पर प्रयास करते हैं।
सामुदायिक विकास एक स्वप्रेरित भावना हैं।

सामुदायिक विकास के प्रकार

  • क्षमता निर्माण
  • सामाजिक पूंजी निर्माण
  • अर्थिक विकास
  • समुदाय संचालित विकास
  • परिसंपत्ति आधारित सामुदायिक विकास
  • सहभागितापूर्ण नियोजन 
आइये हम सब साथ मिल कर अपने समाज और देश को विकास के पथ पर अग्रसर करें।