समता

समता या समानता किसी समाज की वैचारिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रगति को दर्शाती है। भेदभाव, चाहे वह किसी भी आधार पर किया जाए, स्वीकार्य नही है।

धर्म, जाति, वर्ण या ऐसे किसी भी अन्य परिमापक के आधार पर भेदभाव तर्क संगत नही है।

भारतीय संविधान अनु.१४ से लेकर अनु.१८ तक प्रत्येक व्यक्ति को समता का अधिकार प्रदान करता है.

अनु.१४ के अनुसार "भारत राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से अथवा विधियों के समान संरक्षण से राज्य द्वारा वंचित नहीं किया जायेगा ." इस अनुच्छेद में दो वाक्यांश हैं :-

  • "विधि के समक्ष समता"
  • "विधियों का समान संरक्षण"

"विधि के समक्ष समता" का तात्पर्य है कि जन्म ,मूलवंश ,आदि के आधार पर व्यक्तियों के बीच विशेषाधिकारों को प्रदान करने और कर्तव्यों को अधिरोपण करने में कोई विभेद नहीं किया जायेगा तथा प्रत्येक व्यक्ति देश की साधारण विधि के अधीन होगा।

उत्तर भारतीय महासंघ सभी छोटे बड़े भेदभाव भुलाकर , कंधे से कंधा मिलाकर अपने समाज और देश की प्रगति के लिए सतत प्रयत्नरत है।