शिक्षा

माता शत्रुः पिता वैरी, येन बालो न पाठितः ।
न शोभते सभामध्ये, हंसमध्ये बको यथा ॥
शिक्षा भारतीय समाज की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। आज भी लाखों भारतीय शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों में जाते हैं, और सबसे बड़ी बात यह है कि जहां भी जाते हैं, वो स्वयं का विकास तो करते ही हैं साथ ही साथ उस देश की प्रगति में भी अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं।

शिक्षा और ज्ञान हर काल में महत्वपूर्ण थे और आज भी हैं। बेहतर भविष्य के लिए बेहतर शिक्षा अनिवार्य है। बच्चे ही देश का भविष्य हैं। हमे सुनिश्चित करना होगा कि हम एक शिक्षित भारत बनाएं।

उत्तर भारतीय महासंघ शिक्षा की महत्ता को समझते हुए सम्पूर्ण ऊर्जा से प्रयत्न करता है कि समाज के बच्चे सुशिक्षित और सुसंस्कृत हों। साधनहीन विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तिया प्रदान करता है जिससे कि कोई भी बच्चा धन की कमी से अशिक्षित न रह जाये।

शिक्षा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और शिक्षा ही वह हथियार है जो हमे किसी भी परिस्थिति का सामना करने के योग्य बनाती है।